Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 50, Verse 36
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 50, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 50 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
दृश्यते मानसादर्शे यन्त्रदार्वौदरेषु तत् ।
प्रतिबिम्बितमेतन्मे ब्रूहि ब्रह्मन्किमात्मकम् ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रसंगवश सभी प्रतिवि्म्बो का स्वरूप जानने की इच्छावाले श्रीरामभद्र पूछते है।
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : ब्रह्मन्, मानसवृत्ति दर्पण, मणि, जल, और यन्त्र घृष्ट काष्ठ में घट, मुख,
प्रभा आदि के जो प्रतिविम्बि दिखाई पडते हैं, उनका स्वरूप क्या है यह आप मुझसे कहिए