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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 5, Verse 7

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 5, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 5 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

अद्याहं प्रकृतिस्थोऽस्मि स्वस्थोऽस्मि मुदितोऽस्मि च । लोकारामोऽस्मि रामोऽस्मि नमो मह्यं नमोस्तु ते ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

आज मैं अपने पारमार्थिक स्वभाव में स्थित हूँ, स्वस्थ हूँ, प्रसन्न हूँ, लोक जहाँ विश्रान्ति करते हैं, उस सुख का स्वरूपभूत मैं हू, अतएव मैं परब्रह्म राम हूँ, परब्रह्म रामस्वरूप को तथा उसके दर्शन करानेवाले आपको मैं प्रणाम करता हूँ