Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 5, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 5, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 5 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
परामन्तः प्रयातोऽस्मि परमात्मनि निर्वृतिम् ।
दीर्घावग्रहसंतप्तं वृष्ट्येव वसुधातलम् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे चिरकाल से चले आ रहे वषप्रितिबन्ध से (ग्रीष्मादि से) सन्तप्त भूमितल वृष्टि से शान्त हो जाता
है, वैसे ही मैं आपके द्वारा की गयी उपदेश-वृष्टि से भीतर अत्यन्त शान्त हो गया हूँ