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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 49, Verse 29

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 49, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

नात्मनः प्रकृतिर्भिन्ना घटान्मृन्मयता यथा । सन्मृन्मात्रं यथा चान्तरात्मैवं प्रकृतिः स्थिता ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे घट से मृण्मयता पृथक्‌ नहीं हे वैसे ही आत्मा से प्रकृति पृथक्‌ नहीं हे । ओर जैसे घट के अन्दर रहनेवाली मृण्मयता सद्रूप मृत्तिकामात्र है, वैसे ही प्रकृति में रहनेवाली सद्रूपता आत्ममात्र ही स्थित हे