Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 49, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 49, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
युक्त्यैव बोधयित्वैष जीव आत्मनि योज्यते ।
यद्युक्त्यासाद्यते कार्यं न तद्यत्नशतैरपि ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
केवल एकमात्र युक्ति से ही बोध कराकर इस जीव को आत्मा में नियुक्त
कर सकते हैं, क्योकि जो कार्य युक्ति से सुसम्पादित होता है, वह सैकड़ों अन्य उपायों से भी नहीं
होता । भाव यह है कि पुरुषों मेँ असंभावना आदि जो अनेक दोष विद्यमान रहते हैं, उनका एकमात्र
युक्तियाँ ही भलीभाँति निरसन कर देती हैं