Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 49, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 49, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
यस्तु ब्रह्मेति शब्देन वाच्यवाचकयोः क्रमः ।
तत्रापि नान्यताभावमुपदेष्टुं क्रमो ह्यसौ ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
“ब्रह्म” इस शब्द से वाच्य एवं वाचक का जो एक प्रकार से उपक्रम करते हैं, वहाँ पर भी हम
अन्यरूपता का अस्तित्व नहीं कहते; किंतु उपदेश देने के लिए केवल इस क्रम की कल्पना करते
हैं