Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 48, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 48, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 48 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
तथा च मुनयो देवा गणाः सिद्धा महर्षयः ।
आस्वादयन्तः स्वं रूपं सदा तुर्यपदे स्थिताः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
उस तत्त्व के सद्भाव में सर्वसाधारणरूप से अनुमानप्रमाण बतलाकर अब विद्वानों का अनुभवरूप
प्रमाण भी कहते हैं।
अपने आत्मस्वरूप भूमानन्द का आस्वाद ले रहे मुनि, देवता, गण, सिद्ध और महर्षि लोग सर्वदा
तुरीय पद में स्थित हैं