Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 46, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 46, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 46 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
सत्यमेतन्मया दृष्टा तादृशी सा महाशिला ।
शालग्रामे हरेर्धाम्नि विद्यते परिवारिणी ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
(५)
तीर्थयात्रा के समय शालग्राम-क्षेत्र में देखी गयी शिला का गुरुवसिष्ठजी के उपयुक्त वचन से
स्मरण कर रहे श्रीरामचन्द्रजी उसी शिला का यहाँ गुरुदेव भगवान् ने जगत् की कल्पना आदि से- वर्णन
किया है*, यों मानते हुए कहते है ।
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : गुरुदेव, आपने उक्त शिला का जो वर्णन किया है, वह सच हे । (तीर्थ-
यात्रा के प्रसंग में) शालग्रामनामक हरि के क्षेत्र में उपर्युक्त प्रकार की एक महाशिला स्थित है, जो कि
पद्म-वन के चिह्न से युक्त है, वह मैंने अपनी आँखों से देखी है