Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 45, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 45, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
स्यन्दमानरसापूरां स्वाद्वीं रसचमत्कृतिम् ।
यस्यातिशेते नो कश्चिदपि राघव षड्रसः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे राघव, इस
विल्वफल से चू रहे रस से परिपूर्ण अत्यंत स्वादयुक्त रस चमत्कार का कोई भी षड्-रस यानी छः
इन्द्रियों से भोग्य ब्रह्मलोकतक का सुखांश अथवा प्रसिद्ध षड्रस अतिक्रमण नहीं कर सकता