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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 45, Verse 27

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 45, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

इयं कीर्णमहारुद्रगणापूरितकोटरा । दीर्घाभ्रसरणिर्भ्रान्तध्वंसनेभ्यः प्रभाविनी ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

इस चितिशक्ति के कोटर चारों ओर व्याप्त महारुद्र के गणों से भरे हैं, यही लम्बी आकाशरूपा सरणी (मार्ग) है ओर विषयों में लम्पट स्वर्गस्थ जनों के अधःपात में निमित्त होने के कारण उनके ऊपर प्रभाव जमानेवाली भी यही है