Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 45, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 45, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
इदं व्योम महानन्तमियं कालमयी कला ।
इयं नियतिरित्युक्ता क्रियेयं स्पन्दरूपिणी ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसी स्थिति मे आकाश आदि सभी कुछ चितिशक्तिस्वरूप ही है, इसे छोड़ दूसरा कुछ भी नहीं है
यों जानना चाहिए, यह कहते है।
यही चितिशक्ति महान् एवं अनन्त आकाशरूप हे, यही काल की क्षण, घडी, दिन, मास, वर्ष,
कल्प आदिरूप कला हे । यही "नियति" इस नाम से कही गई है ओर यही स्पन्दनरूपिणी क्रिया हे