Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 43, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 43, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 43 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
एतत्त्वं श्रुतवान्सर्वं स्थितस्त्वं परिपूर्णधीः ।
यदिच्छसीतरत्प्रष्टुं तत्पृच्छ रघुनन्दन ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
हे रघुनन्दन,
यह सब आपने सुना ओर परिपूर्ण बुद्धि होकर आप स्थित भी हैं । जो कोई दूसरा प्रश्न इस विषय में
पूछना चाहते हों, तो उसे पूछिए और पहले विचारारम्भ में (वेराग्य-प्रकरण में) जो आपने प्रश्न किये
थे, उनमें से यदि कोई उत्तर के विना रह गया हो तो उसे भी आज आप पूछिये