Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 43, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 43, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 43 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
चिदेकतानतामेत्य सौषुप्तीमागतः स्थितिम् ।
अद्यप्रभृति राम त्वं तुर्यावस्थात्मको भव ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त पूजन की अन्तिम सीमा में श्रीरामचन्द्रजी को स्थिर करते हैं।
हे श्रीरामजी, पहले एकमात्र चैतन्यस्वरूपता प्राप्तकर ओर तदनन्तर सुषुप्तिकालीन स्थिति
प्राप्तकर आप आज ही से तुरीयावस्था स्वरूप हो जाड्ये