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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 43, Verse 12

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 43, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 43 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

जानास्येव गतिं चित्रां विषयाणां प्रमाथिनीम् । यथायान्ति यथा यान्ति यथा परिभवन्ति च ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामभद्र, वे व्यग्रता उत्पन्न करनेवाली विषयों की चित्र-विचित्र परिस्थितियाँ पहले जिस तरह आती हैं, जिस तरह जाती हैं और जिस तरह स्वासक्त पुरुष को पराजित करती हैं, यह आप जानते ही हैं