Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 42, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 42, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
पुष्टः प्रथमसंकल्पस्तां मनोमूर्तिमास्थितः ।
यद्यथा कल्पयत्याशु तत्तथानुभवत्यलम् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
सूक्ष्म भूतों की सृष्टि द्वारा
पुष्ट हुआ प्रथम संकल्प ही उस समध्टिव्यष्टिस्वरूप मनोमय मूर्ति प्राप्तकर यानी हिरण्यगर्भ होकर
जिस भुवन, प्रजा, सृष्टि आदि की जिस तरह से कल्पना करता है, उसे उसी तरह से व्यवहारयोग्य
अनुभव करता है