Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 42, Verse 18

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 42, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

आक्रान्तमपि नाक्रान्तं तथैव जगता सता । अथ नाक्रान्तमाक्रान्तमिव संकल्पमेरुणा ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

जिस तरह उन्नतरूप से अवस्थित संकल्पमय मेरूपर्वत से वास्तव में आक्रान्त न हए ही देश, काल आदि संकल्पकाल में आक्रान्त- से प्रतीत होते हैं, वैसे ही व्यावहारिक जगत्‌ से अनाक्रान्त भी देश, काल आदि संकल्प-काल में आक्रान्त-से प्रतीत होते हैं