Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 41, Verse 56
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 41, verse 56 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 41 · श्लोक 56
संस्कृत श्लोक
यस्य सत्योऽप्यसत्यो वा शून्य एव हि यक्षकः ।
विलीनस्तस्य कैवल्यात्किमन्यदवशिष्यते ॥ ५६ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस
प्रौढ़ की दृष्टि में व्यावहरिक या प्रातिभासिक दुष्ट संसारूप यक्ष शून्यस्वरूप होने के कारण नित्य
विलीन ही है, उसकी दृष्टि में कैवल्य के सिवा कोई और दूसरा क्या अवशिष्ट रह सकता है ?