Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 41, Verse 49
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 41, verse 49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 41 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
ततः पुरुषरूपैकभावनात्पुरुषाकृतिम् ।
काकतालीयवद्दृष्ट्वा तुष्टं पुष्टं भवत्यलम् ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर हाथ, पैर आदि अवयव समूहों तथा आन्तर कोशो में पुरुष के आकार
के साथ तादात्म्य की भावना करने के कारण अपने में पुरुष की आकृति देखता है ओर उसे
काकतालीय-न्याय से अकस्मात् व्यवहार में समर्थ देखकर अत्यन्त हृष्ट -पुष्ट हो जाता है