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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, Verse 7

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

प्रवाहपतितार्थस्थः स्वबोधस्नानशुद्धिमान् । नित्यावबोधार्हणया बोधलिङ्गं प्रपूजयेत् ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रारब्ध के प्रवाह से प्राप्त हुए अर्थो में (भोगो में) स्थित, अशुद्धि के प्राप्त होने पर भी बार-बार असंग एवं विशुद्ध अपने ज्ञानस्वरूप स्नान से प्राप्त शुद्धि से युक्त होकर पुरुष निरन्तर ज्ञानरूप पूजा सामग्री से बोधात्मक लिंग की पूजा करे