Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, Verse 61
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, verse 61 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 61
संस्कृत श्लोक
स्वप्नेऽप्यदृष्टहृल्लेखमज्ञानाभ्रपरिक्षये ।
शान्ताहंतादिमिहिकं ज्ञः शरद्व्योम राजते ॥ ६१ ॥
हिन्दी अर्थ
अज्ञानरूप मेघो के नष्ट होने पर स्वप्न में भी जिसमें काम आदि नहीं देखे जाते तथा
जिसका अहन्तारूप कुहरा शांत हो चुका है, वह तत्त्वज्ञ शरत्कालीन आकाश की नाई शोभित होता
हे