Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, Verse 39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
सतां हृदयगामिन्या रूढया शशिशीतया ।
मैत्र्या माधुर्यधर्मिण्या हृत्स्थमात्मानमर्चयेत् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
नाना प्रकार के कलहों के तरंगों एवं कामिनियों के उल्लासो से शोभित राग और द्वेष
के विलास से उस सौम्य आत्मदेव की पूजा करे ॥३ ८॥
तब क्या कलह करने में भी तत्पर होना चाहिए ? इस पर नहीं, ऐसा कहते हैं।
सज्जनों के हृदय में रहनेवाली, चन्द्रमा की नाई, शीतल, मधुरस्वभाव रूढ मैत्री से हृदय-प्रदेश में
स्थित उस आत्मदेव की पूजा करे