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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 38, Verse 6

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 38, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

पूजनं ध्यानमेवान्तर्नान्यदस्त्यस्य पूजनम् । तस्मात्त्रिभुवनाधारं नित्यं ध्यानेन पूजयेत् ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

हे महर्षे, भीतर का ध्यान ही इस आत्मदेव की पूजा है यानी ध्यान ही पूजा की सामग्री ओर स्वयं पूजन-क्रिया है, इसके सिवा दूसरी कोई भी वस्तु इसकी पूजनसामग्री या पूजा नहीं है, इसलिए तीनों भुवनो के आधारभूत इस आत्मदेव की ध्यान से निरन्तर पूजा करनी चाहिए