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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 38, Verse 12

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 38, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

इमां भूतश्रियं तस्य रोमालिं प्रविचिन्तयेत् । विविधारम्भकारिण्यस्त्रिजगद्यन्त्ररज्जवः ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

इस जगत्‌-त्रय में विभिन्न-विभिन्न प्रकार के पदार्थों का निर्माण करने के लिए विनिर्मित यन्त्र रज्जुओं की सी ये इच्छा आदि शक्तियाँ उसके शरीर में रहनेवाली नाडियाँ हैं, यों जानना चाहिए