Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 37, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 37, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
आमहापञ्चमेशानं परिणाममया इमे ।
इदमित्थमिदं नेति नियतिर्भवति स्वयम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
समस्त शक्तियो का एकीकरण कर उनके कार्यों की इयत्ता का निश्चय कराते हैं।
ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, ईश्वर ओर ईशान इन उत्तरोत्तर उत्कर्षवाले देवताओं में पंचम ईशानपर्यन्त
(सदाशिवपर्यन्त) सब उस चितिशक्ति के ही परिणामरूप हैं । यह इस प्रकार हो और यह इस प्रकार न
हो यों सब कार्यो की व्यवस्था करनेवाली मूलशक्ति भी स्वयं चितिसत्ता है