Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 35, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 35, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 35 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
नित्याहूतः स सर्वस्थो लभ्यते सर्वतः स्वचित् ।
यां यां वस्तुदशां याति तत एव मुने शिवम् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुने, यह शिवात्मक चिति जिस-
जिस वस्तुस्थिति की ओर जाती है, वहीं पर विषय, विषयप्रकाश, विषयमननात्मक मन ओर उनकी
साक्षीभूत दृष्टि इनका स्वरूप स्वयं ही धारणकर लेती है, दूसरा कोई धारण नहीं करता