Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 35, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 35, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 35 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
संपन्नदेशकालायाः क्रमः स्याद्वर्णनासु कः ।
ब्रह्मविष्णुहरादीनामतोऽयं परमः पिता ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
चूँकि ब्रह्मा, हरि, हर आदि देवताओं का भी देहरूप उपाधि का परिग्रह आविद्यक ही हे,
इसलिए यह चैतन्यस्वरूप महादेव उनका भी परम पिता हे । जिस तरह पल्लवो का मूल बीज वृक्ष हे,
उसी तरह चैतन्यात्मा महादेव उनका मूल बीज है