Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 34, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 34, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
कालताकाशते त्यक्त्वा सकले सकलाकला ।
न जडा नाजडा स्फारा धत्ते सत्तामनामिकाम् ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
क्रियारूप काल-कला से तथा अवकाश की अपेक्षा
रखनेवाली परिच्छिन्न वस्तुरूपं आकाश की कला से युक्त कालरूपता ओर आकाशरूपता का, उन
कलाओं के परित्याग से ही, परित्याग कर समस्त दुश्यमात्र की कल्पना न करनेवाली, जडता और
अजडता से शून्य विशुद्धस्वभाव उक्त चिति शब्दों से निर्वचन के अयोग्य-वक्ष्यमाण सत्ता धारण करती
है