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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 33, Verse 23

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 33, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

चिद्वपुः स्वयमेतेन ह्येकतामेति जीवताम् । चित्तत्त्वस्यावभासेन जीवो जीवति तन्मयः ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

यह चैतन्य शरीर चिति ही स्वयं इस पूर्ववर्णित पुर्यष्टक शरीर के द्वारा तादात्म्यअध्यासस्वरूप जीवता प्राप्त करती है और चित्तत्त्व के प्रकाश से चित्परचुर होता हुआ जीव जीता है यानी प्राणन आदि क्रिया प्राप्त करता है