Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 33, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 33, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
एवं रूपपदातीतं यद्रूपं परमात्मनः ।
यत्तु नामाहममलं विषयो न गिरां च तत् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
पारमार्थिक मेरा तत्त्व वही है, यह कहते हैं।
उन पूर्वोक्त नामों एवं रूपों तथा सामने दिखाई दे रहे साकाररूपों से अतीत जो परमात्मा का
स्वरूप है तथा जो अशेष मलों से रहित अहंपदार्थ है, वह वाणी और मन का विषय नहीं है