Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 32, Verse 51
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 32, verse 51 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
चिदम्बुधौ स्फुरन्त्येता देहबुद्बुदपङ्कतयः ।
इतश्चान्या इतश्चान्या एतास्वास्था न धीमतः ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
चैतन्य-समुद्र में ये देहरूपी बुद्बुदों की
पंक्तियाँ यहाँ एक प्रकार की तो दूसरी जगह दूसरे प्रकार की होकर स्फुरित होती हैं, बुद्धिमान जन इनमें
आस्था नहीं करते