Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 31, Verse 38
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 31, verse 38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 31 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
संकल्पाज्जीवतामेत्य निःसंकल्पात्मनात्मना ।
चिज्जडं नो जडं भावं भावयन्ती स्वसंस्थिता ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
संकल्पशून्यस्वरूप
यह चिति अपने-आप, संकल्प से जीवरूपता प्राप्त कर जड़ जगत का स्वरूप चैतन्य ही हे, यों भावना
करती हुई अपने स्वरूप में ही स्थित हो जाती है