Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verse 99
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, verse 99 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 99
संस्कृत श्लोक
सर्वात्मत्वात्सर्वगत्वात्सर्वशक्तित्वयोगतः ।
सर्वत्वादेवंरूपैव खादप्यच्छैव सा परा ॥ ९९ ॥
हिन्दी अर्थ
सबकी आत्मा, सर्वत्र एवं माया के योग से सर्वस्वरूप होने के
कारण चिति उस तरह जगत-रूप ही हो जाती है । परमार्थ-दशा में तो वह परा चिति आकाश से भी
अत्यन्त निर्मल एवं व्यापक ही है