Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verse 89
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, verse 89 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 89
संस्कृत श्लोक
बाल्ये विवशसर्वार्था यौवने चिन्तयाऽऽवृता ।
वार्धकेऽप्यतिदुःखार्ता मृता कर्मवशीकृता ॥ ८९ ॥
हिन्दी अर्थ
संक्षेप से उक्त अर्थ का विस्तार करते है ।
बाल्यकाल में चिति के समस्त विषय पराधीन रहते हैं, यौवन काल में धनादि-चिन्ता से उसका
विवेक आवृत हो जाता हे । वृद्धावस्था में भी अनेकविध दुःखों से पीडित रहती है ओर समय आने पर
अपने कर्मो से वशीकृत हुई मर जाती है