Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verse 85
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, verse 85 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 85
संस्कृत श्लोक
परं वैषम्यमायाति संकटात्संकटं गता ।
दुःखाद्दुःखं निपतिता विपदो विपदि स्थिता ॥ ८५ ॥
हिन्दी अर्थ
अनन्तर एक संकट से दूसरे संकट को प्राप्त हुई, एक दुःख से दूसरे दुःख में गिरी हुई एक
विपत्ति से दूसरी विपत्ति में पहुँची हुई चिति उत्तरोत्तर अत्यन्त विषम स्थिति प्राप्त करती है