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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 99

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, verse 99 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 99

संस्कृत श्लोक

दत्तार्घ्येण मया देवः संप्रणम्याभिवन्दितः । ततश्चन्द्रप्रभासख्या ऋज्व्या शीतलया तया ॥ ९९ ॥

हिन्दी अर्थ

अपने भाग्य के महान उदय तथा अपने ऊपर महादेवजी के सानुग्रह दृष्टिपात का वर्णन करते हैं। तदनन्तर चन्द्रज्योत्स्ना की सखीभूत कोमल, शीतल तथा समस्त सन्तापो का अपहरण करनेवाली उस महादेवजी की दृष्टि का (स्वानुभूत अलौकिक निरतिशयानन्द के आविभविभरूत चमत्कार से परिपूर्ण दृष्टि का) मेँ दीर्घकाल तक भाजन बना रहा