Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 66
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, verse 66 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 66
संस्कृत श्लोक
पिशाचोऽपि मनो राम शून्यदेहगृहे स्थितः ।
भावयत्येष दुष्टात्मा मौनमुत्तम संस्पृशन् ॥ ६६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे सर्वश्रेष्ठ
श्रीरामजी, शून्यदेहरूपी घर में स्थित यह मनरूपी दुष्टात्मा पिशाच, वास्तव में आत्मा का स्पर्श न कर
रहा भी भें आत्मा का स्पर्श करता हूँ" यों चुपचाप भावना करता रहता है