Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 41
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, verse 41 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
स्वसंकल्पविलासेन देहगेहे दुराकृतिः ।
उन्मत्तचित्तवेतालः परिवल्गति लीलया ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
अहंकार के रहने पर दूसरा भी अनर्थ प्राप्त होता है, यह कहते है ।
देहरूपी घर में अपने नानाविध संकल्पां के विलास से बीभत्स आकृतिवाला मदोन्मत्त चित्तरूपी
वेताल लीला से चारों ओर मिथ्या गर्जन करता रहता है