Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 37
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, verse 37 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
यथा दिवसकर्माणि भास्करः स्वस्थ एव सन् ।
करोत्येवमिमां राम कुरु पार्थिवसंस्थितिम् ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
तब राज्य-व्यवस्था कैसे चलेगी ? इस पर कहते है ।
हे श्रीरामजी, जैसे दूरातिदूर आकाश में स्थित रहकर ही सूर्यदेव दैनिक कार्य करते हैं, वैसे ही आप
भी दूर रहकर यह राज्य-व्यवस्था कीजिए