Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 130
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, verse 130 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 130
संस्कृत श्लोक
ज्ञातज्ञेया हि ये सन्तो बालक्रीडोपमं च ते ।
आत्मध्यानादृते ब्रह्मन्कुर्वन्तो देवपूजनम् ॥ १३० ॥
हिन्दी अर्थ
हे ब्रह्मन्, जो विदिततत््व सन्त-महात्मा किसी समय आत्म-समाधि से व्युत्थित होकर साकार
देवपूजन करते हुए पाये जाते हैं, वे बालक्रीडा के सदुश आनन्दार्थं ही साकार पूजन करते हैं, न कि
कृत्रिम भोगों की अभिलाषा से