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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verses 9–10

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, verses 9–10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 9,10

संस्कृत श्लोक

भुशुण्डचरिते ब्रह्मन्नेतस्मिन्कथिते त्वया । यच्छरीरगृहं प्रोक्तं मांसचर्मास्थिनिर्मितम् ॥ ९ ॥ तत्केन नाम रचितं कुतो वा तत्समुत्थितम् । कथं वा स्थितिमायातं को वा तत्रावतिष्ठते ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

हे ब्रह्मन्‌, आपके द्वारा कहे गये इस भुशुण्ड-चरित्र मे मांस, चर्म ओर अस्थि से निर्मित शरीररूपी घर का जो उल्लेख किया गया है, उसकी किसने रचना की, कहाँ से वह उत्पन्न हुआ, किस तरह से स्थित हुआ ओर उसमें कौन रहता है ? (शरीर का कर्ता. हेतु, उसकी स्थिति का प्रकार ओर उसमें रहनेवाला स्वामी - इन चारों के विषय में यहाँ प्रश्न किये गये हैं )