Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 70
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, verse 70 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 70
संस्कृत श्लोक
आभासस्य परित्यागे भवस्येकान्तनिर्मलः ।
नाहमस्मि न मे भोगाः सत्या इत्यभिभाविते ॥ ७० ॥
हिन्दी अर्थ
निराभासता की (त्रिपुटीशून्यस्वरूपता की) सिद्धि में हेतुभूत दो प्रकार की उपासना कहते हैं।
श्रीरामजी, न मैं सत्य हूँ ओर न तो मेरे भोग-विषय ही सत्य हैं, इस प्रकार अच्छी तरह भावना
(चिन्तन) करने पर यह निरर्थक जगत-रूपी आडम्बर अनर्थ के लिए प्रतीत नहीं होता