Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 68
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, verse 68 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 68
संस्कृत श्लोक
आभासमात्रसामान्यमिदमालोकयानघ ।
आभासमात्रकं राम चित्तामर्शकलङ्कितम् ॥ ६८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, सन्मात्ररूप आभास भी चित्त की विशेष कल्पना के कारण कलंकित ही रहता हे,
इसलिए उसका (सन्मात्रस्वरूप आभास का) भी परित्याग कर यानी स्व -स्वरूप-भिन्न बुद्धि से छोडकर
निराभास से युक्त (ध्याता, ध्यान ओर ध्येय इस त्रिपुटी से शून्य) हो जाइए