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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 59

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, verse 59 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 59

संस्कृत श्लोक

क्रियावैचित्र्यमात्रे तु किमन्यत्परिदेव्यते । नाहमस्मि न चाभूवं भविष्यामि न सोऽधुना ॥ ५९ ॥

हिन्दी अर्थ

मैं न वर्तमान में हूँ, न वह मेँ भूतकाल में था और न भविष्य में रहूँगा ही। यह शरीर केवल काम, कर्म, वासना एवं अविद्यारूपी दोष से उत्पन्न हुआ प्रतीत होता है, इसलिए किस दूसरे के विषय में शोक किया जाय ?