Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 51
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, verse 51 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
नास्तमेति न चोदेति सम्यगालोकनान्मनः ।
निर्णीय सर्वभावानामसत्त्वं सत्त्वमेव च ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
सम्यक्
तत्त्वज्ञान के कारण घटादि समस्त पदार्थों की सत्ता ओर असत्ता का निर्णय करने के अनन्तर विषय-
कामना से शून्य हुआ मन तत्त्वज्ञान के प्रभाव से शान्त हो जाता है