Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
परिभ्रमसि येनेह स देहस्ते क्व संस्थितः ।
गतैर्देहैर्मनोराज्ये या विचित्रा जगत्क्रियाः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महाबाहो, कल्पनाविनाश के अनन्तर विनष्ट हो जानेवाली जिन देहो से मनोराज्य में चित्र-विचित्र
जागतिक व्यापारों का अनुष्ठान करते हैं, वह आपकी देह कहाँ स्थित रहती हैं ?