Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 26, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 26, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
जरामरणदुःखेषु राज्यलाभसुखेषु च ।
न बिभेमि न हृष्यामि तेन जीवाम्यनामयः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
जरा एवं मरण के सदृश कष्टों एवं राज्यप्राप्ति के सदृश
सुखों के प्राप्त होने पर न तो मैं रता हूँ और न प्रसन्न ही होता हू। इसलिए में अनामय होकर जीवित
हूँ