Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 26, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 26, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
इदमद्य मया लब्धमिदं प्राप्स्यामि सुन्दरम् ।
इति चिन्ता न मे तेन चिरं जीवाम्यनामयः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज, मैंने आज यह प्राप्त किया और भविष्य मेँ दूसरा सुन्दर प्राप्त करूँगा, इस
प्रकार की मुझे कभी चिन्ता नहीं होती, इसलिए शोकरहित होकर चिरकाल से जी रहा हूँ