Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
प्राणोऽयमनिशं ब्रह्मन्स्पन्दशक्तिः सदागतिः ।
सबाह्याभ्यन्तरे देहे प्राणोऽयमुपरि स्थितः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे ब्रह्मन्, इस प्राण में स्पन्दन शक्ति तथा निरन्तर गतिक्रिया रहती है । इस प्रकार
स्पन्द-शक्ति ओर सदा गति यह प्राण बाह्य एवं आन्तर सवांगों से परिपूर्ण देह में ऊपर के स्थान में
निरन्तर स्थित रहता है यानी ऊर्ध्वभाग में सदा गमन करता है