Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
न बघ्नाति रतिं चेतः श्वदृतौ ब्राह्मणो यथा ।
एतां दृष्टिमवष्टभ्य ये स्थिताः कृतबुद्धयः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज,
इस प्राण-दुष्टि का अवलम्बन कर जो कृतबुद्धि महात्मा स्थित हैं, उन्होंने समस्त प्राप्तव्य वस्तुओं
को प्राप्त कर लिया है ओर वे ही समस्त खेदं से विनिर्मुक्त हो गये हैं