Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 24, Verse 30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 24, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
बहुनात्र किमुक्तेन सर्वमेव शरीरके ।
करोति भगवान्वायुर्यन्त्रेहामिव यान्त्रिकः ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज, इस विषय में अधिक कहने से क्या फल ? शरीर में जो कुछ यह क्रिया या व्यापार होता है, वह
सब शक्तिसम्पन्न वायु ही उस प्रकार कराता है, जिस प्रकार यन्त्रचालक प्रतिमा आदि यन्त्रो की
नृत्यादि चेष्टा कराता है